Tuesday, 25 April 2017

ढांक मे वाळाकुल (Vala Rajput-Dhank State)


ढांक मे वाळाकुल :-

एभल वाला 3 की बहन का विवाह जेठवा राणा विकियाजी के साथ किया था. जेठवा का राज्य 'घुमली' था. ढांक उनकी जागिर थी. अपनी पटरानी के पुत्र वजेसिंह को घुमली की गद्दी सोंप राणा विकियाजी वालारानी के साथ ढांक आये. राणाजी की मृत्यु हुई तब उनका पुत्र नागजी जेठवा सगीर थे. ईस लिए एभल वाला ने अपने पुत्र अर्जुनसिंह को ढांक जागिर की देखभाल करने भेजा. नागजी जेठवा की मृत्यु भी अविवाहित थे तभी हो गई और अर्जुनसिंह वाला ने ढांक को स्वतंत्र राज्य बनाकर वालाकुल की स्थापना की.
अर्जुनसिंह ने ई.स.1221 के बाद मे ढांक की गद्दी संभाली. ईसप्रकार ई.स.1260 मे राणजी गोहिल के तलाजा पर आक्रमण के समय वाला के दो राज्य थे. ढांक और तलाजा. बाद मे तलाजा हारने के बाद ढांक का राज्य बचा. आखिर तक वही वाला की कर्मभूमि बना रहा.
सरतानजी वाला (1414-1452) के समय गुजरात के सुल्तान महमुद बेगडा के पुत्र तातारखान को महमुद ने जुनागढ का सुबा बनाया था. उसने महसुल लेने के आशय से ढांक पर चडाई की. सरतानजी ने क्षात्रत्व के अनुसार उसका सामना किया तादाद कम होने कि वजह से तातररखानने ढांक पर कब्जा किया. सरतानजी अपने बचे हुए साथियो के साथ ढांक के पश्चिम मे पाटन नामक गांव के पास पर्वतो मे रणनितीयां बना रहे थे. उस समय चारण जोगमाया आई नागबाई पाटन आये थे. सरतानजी को ये बात पता चली तो वे माता के दर्शन को गये और अपनी व्यथा सुनाई. माता ने आशिर्वाद दिया और 84 गांवो के तोरण बांधने को कहा. सुबह सरतानजी ने पुरी ताकात से ढांक पर हमला कर ढांक पर कब्जा किया. मुस्लिम सैन्य अपने नगारे छोड भागे थे वे नगारे आज भी ढांक दरबारगढ मे मोजुद है.
सरतानजी वाला ने आई नागबाई को वाला कुल की सहायक कुलदेवी स्थापित किया और पाटन मे माताजी का मंदिर बनवाया.

वाळा तणा वलभी तळाजा वसुधे विख्यात छे,
नेहड़ी साईं काज सोंपण माथ एभल भ्रात छे,
भाणेजनी भीती ज भांगे उगो उगीने नीत जी,
खांभी खड़ी खोडाय दिव्य राजपूती रीत जी,

मन कूड़ा हेवा ढांक लेवा सुबा मनसुबा घड़े,
तातार खानो गढ़जुनानो दळ कटक लइने चड़े,
नागल्ल मानो वेण जानो सरतानो हीत जी,
कुळदेवी किरपा करे दिव्य राजपूती रीत जी

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